Nari Shakti Vandana abhinaya yojana 2023

        Nari Shakti Vandana Abhinaya.

Nari Shakti Vandana लोकसभा ने बुधवार को दिन भर चली चर्चा के बाद महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (128 वां संशोधन) विधेयक- 2023 को पारित कर दिया.

लोकसभा और देश की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले विधेयक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम -2023’ (128 वां संविधान संशोधन) के पक्ष में लोकसभा के 454 सांसदों ने वोट दिया.

यह स्कीम में सभी महिला के लियस आरक्षण दिया जाएगा जिसकी मदद से इसका लाभ ले पायेगें। इसकी मदद से हर औरत को सभी पीकर के सरकारी लाभ ले पायेगें।

जिसकी मदद से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम -2023’ (128 वां संविधान संशोधन) के पक्ष में लोकसभा पास हो गया है।

Nari Shakti Vandana

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विधेयक पर चर्चा की शुरुआत की. राहुल गांधी, गृह मंत्री अमित शाह, महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी समेत कुल 60 सदस्यों ने इस विधेयक पर चर्चा में भाग लिया. इनमें 27 महिला सदस्य शामिल हैं. मेघवाल ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने इस बार ऐसी व्यवस्था की है कि महिलाओं को इस बार इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने तकनीकी मुद्दों पर कहा, “आप (विपक्ष) चाहते हैं कि यह विधेयक तकनीकी कारणों से फंस जाये, लेकिन हम इस बार इसे फंसने नहीं देंगे.”

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Nari Shakti Vandana भारत में महिला आरक्षण को और बेहतर बनाने के सुझाव:

क्रमांक राज्य का नाम महिला विधायक (%)
01 पश्चिम बंगाल 13.70
02 छत्तीसगढ़ 14.44
03 झारखंड 12.35
04 बिहार 10.70
05 दिल्ली 11.43
06 राजस्थान 12.00
07 पंजाब 11.11
08 यूपी 11.66
09 उत्तराखंड 11.43
10 हरियाणा 10.00

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(Benefits of Women Reservation Bill)

1Mahila Aarakshan Bill Pass 2023 होने से महिलाओं की हिस्सेदारी पॉलिटिकल फील्ड में  बढ़ेगी।

2 महिला आरक्षण बिल 2023 के तहत जो 33% आरक्षण देने की बात कही जा रही है उसमे भी

3 एससी और एसटी जाति की महिलाओ को उप आरक्षण मिलेगा।

4 इस बिल के लागू होने से लेकर 15 वर्षो तक महिलाओ को 33% आरक्षण दिया जाएगा।

5 नारी शक्ति वंदन बिल के कारण लोकतंत्र मजबूत हो सकेगा।

महिला आरक्षण बिल का इतिहास (History)

वर्ष 2023:- सभी माहि ला को ३३% नारी शक्ति वंदन अधिनियम -2023’ (128 वां संविधान संशोधन) पास किया गया है. समय में यदि हम देखे तो लोकसभा सांसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी 15% से भी कम है। जो कि दूसरे देशों की कंपेयर में भारत में महिलाओं की पॉलिटिकल भागीदारी काफी हद तक नीचे है।

पीछे छूट जाएंगी OBC महिलाएं .

विधायिका में महिलाओं को 33% आरक्षण यह एक विशेष प्रावधान हैं. इसमें यह सुनिश्चित होना चाहिए की इसका 50% हिस्सा एसटी, एससी एवं ओबीसी महिलाओं को मिलेगा. एसटी एससी महिलाओं को संवैधानिक व्यवस्था के कारण 24% शायद आरक्षण मिल भी जायेगा किंतु ओबीसी महिलायें पीछे छूट जाएंगी.

पंचायती राज, स्थानीय निकाय में पिछड़ी जाती के महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण का प्रावधान है. साथ ही मण्डल कमीशन के द्वारा चिह्नित मुस्लिम समुदाय की पिछड़ी जाति की महिलाओं को भी इसमें शामिल होना चाहिए. यदि इस विशेष प्रावधान के बगैर यह विधेयक पारित हो रहा है तो पिछड़े वर्गों की महिलाएं इस विशेष अवसर से वंचित हो रही है.

 

 

 

 

 

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